Home समाचार डोंगरगढ़ में भाजपा के भीतर बड़ा विस्फोट: जिला अध्यक्ष के नोटिस का...

डोंगरगढ़ में भाजपा के भीतर बड़ा विस्फोट: जिला अध्यक्ष के नोटिस का जवाब 111 प्रमुख नेताओं के सामूहिक इस्तीफे से दिया

17
0

डोंगरगढ़ में भाजपा के भीतर बड़ा विस्फोट: जिला अध्यक्ष के नोटिस का जवाब 111 प्रमुख नेताओं के सामूहिक इस्तीफे से दिय
० शहर मंडल अध्यक्ष पर उपेक्षा व गुटबाजी का आरोप; एलबी नगर क्षेत्र में भी आदिवासी नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष की लहर
डोंगरगढ़ (दावा)। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ शहर में भारतीय जनता पार्टी का अंतर्विरोध और गुटबाजी अब खुलकर सरेआम हो गई है। जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत द्वारा शहर के वरिष्ठ नेताओं को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद डोंगरगढ़ के राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। स्थानीय संगठन की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर शहर के 111 प्रमुख एवं निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक रूप से त्यागपत्र दे दिया है। असंतोष की यह आग सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों और एलबी नगर क्षेत्र तक फैल चुकी है, जहाँ पूर्व जनपद सदस्यों व आदिवासी समाज के कद्दावर नेताओं ने भी पार्टी से नाता तो?ने का मन बना लिया है।
शहर मंडल अध्यक्ष पर उपेक्षा और परिवारवाद का गंभीर आरोप
जिला भाजपा अध्यक्ष को प्रेषित पत्र में असंतुष्ट कार्यकर्ताओं व नेताओं ने डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ताओं ने पत्र में आरोप लगाया कि शहर मंडल में जब से जसमीत बन्नौआना अध्यक्ष बने हैं, तब से समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल 4 चिह्नित व्यापारी नेताओं के इशारों पर फैसले लिए जा रहे हैं।
पद लोलुपता व गुटबाजी – एक ही व्यक्ति और चहेतों को एक से अधिक पदों पर बैठाया जा रहा है, जबकि चुनाव में ईमानदारी से मेहनत करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को घर बैठने पर मजबूर कर दिया गया है। पार्टी के भीतर पनपे परिवारवाद और उपेक्षा से व्यथित होकर कार्यकर्ताओं ने सामूहिक त्यागपत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (भाजपा नई दिल्ली), प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और संगठन महामंत्री पवन साय को भी भेजी है।
इस्तीफा देने वालों में कई बड़े और चर्चित चेहरे शामिल
सामूहिक इस्तीफा देने वाले 111 कार्यकर्ताओं में डोंगरगढ़ भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और ज़मीनी कार्यकर्ता पूर्व पार्षद तुलसी मिश्रा, संतोष राव, प्रिंस कक्कड़, परविंदर सिंह (मोंटी), श्रीमती ज्योति बड़वईक, वीरेंद्र साहू, संतोष शुक्ला, वीरेंद्र कुमार सोनी, मनोज कुमार गुप्ता, दुर्गेश साहू, पूर्व पार्षद कुसुम मरकाम, कमलेश धामगाए, शेख नईम, राजेश गजभीए और रवि रंजन मंडल के नाम प्रमुख रुप से शामिल है।
नगरीय निकाय चुनाव से शुरू हुई अंतर्विरोध की नींव
डोंगरगढ़ भाजपा में अंतर्विरोध का बीजारोपण नगर पालिका चुनाव के दौरान गलत टिकट वितरण से हुआ था। टिकट कटने के बाद निर्दलीय चुनाव जीतकर आए वरिष्ठ पार्षद अमित छाबड़ा (जो कांग्रेस शासनकाल में पालिका में नेता प्रतिपक्ष रहकर संघर्ष करते रहे) को चुनाव के दौरान निष्कासित कर दिया गया था। इसी तरह भारी अंतर से जीत दर्ज करने वाली श्रीमती प्रीति चमन समुदे को निष्कासित करने के बावजूद बहुमत वाली भाजपा पालिका परिषद की पीआईसी में जगह दी गई, जबकि 20 वर्षों से पार्टी का चेहरा रहे अमित छाबड़ा को दरकिनार रखा गया।
हाल ही में गुणवत्ता के मुद्दे पर आवाज उठाने वाली सभापति प्रीति चमन समुदे को पीआईसी से बेदखल किए जाने के बाद से असंतोष और गहरा गया है। अब असंतुष्ट नेताओं का जमावड़ा अमित छाबड़ा के नेतृत्व में लामबंद हो रहा है।
ग्रामीण अंचल में भी हलचल: आदिवासी नेता मनोज नेताम ने दिए त्यागपत्र के संकेत
शहर के साथ-साथ ग्रामीण व एलबी नगर क्षेत्र में भी वरिष्ठ भाजपा नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच भारी आक्रोश है। दो बार के पूर्व जनपद सदस्य व क्षेत्र के कद्दावर आदिवासी नेता मनोज नेताम ने मीडिया से चर्चा में अपनी व्यथा जाहिर करते हुए कहा ‘मैं संगठन के उच्च पदों पर बैठे नेताओं के क्रियाकलाप और उपेक्षा से बुरी तरह परेशान हूँ। डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से आने और आदिवासी वर्ग से संबंध रखने के बावजूद संगठन में मुझे आज तक कोई जिम्मेदारी या पद नहीं दिया गया। जब मेरी कोई पूछ-परख ही नहीं है, तो मैं किसके लिए काम करूँ? इससे बेहतर है कि मैं राजनीति से दूर रहकर अपना काम करूँ।’
सामूहिक इस्तीफे और वायरल हो रहे पत्रों से डोंगरगढ़ का भाजपा संगठन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है और आने वाले दिनों में यह अंतर्कलह जिला संगठन के लिए बड़ी सिरदर्दी साबित हो सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here