खपरीखुर्द-चवेली मार्ग पर हादसे के बाद बेसुध पड़ा रहा मवेशी, पंचायत, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर उठे गंभीर सवाल
ठेलकाडीह (दावा)। सडक़ हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ एक बेजुबान मवेशी चार दिनों तक खपरीखुर्द और चवेली के बीच सडक़ किनारे असहनीय दर्द में जिंदगी और मौत से जूझता रहा। समय पर किसी प्रकार की चिकित्सकीय मदद न मिलने के कारण आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। चार दिनों तक खुले आसमान के नीचे तड़पते इस बेजुबान की मौत ने स्थानीय पंचायत प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और पशु चिकित्सा तंत्र की कार्यप्रणाली के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार अज्ञात वाहन की टक्कर से मवेशी बुरी तरह चोटिल होकर चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था। दर्द से कराहता यह बेजुबान चार दिनों तक उसी हाल में सडक़ किनारे पड़ा रहा। इस व्यस्त मार्ग से रोजाना सैकड़ों राहगीर, स्थानीय जनप्रतिनिधि और पंचायत प्रतिनिधि गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी आगे आकर घायल मवेशी के प्राथमिक उपचार या उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की सुध नहीं ली।
चार दिन तक क्यों नहीं पहुंचा कोई जिम्मेदार?
इस हृदयविदारक घटना ने कई अनुत्तरित सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या चार दिनों तक स्थानीय ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों अथवा पशुपालन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी? यदि जानकारी थी, तो तत्काल पशु चिकित्सक को मौके पर क्यों नहीं भेजा गया या मवेशी को किसी नजदीकी गौशाला में शिफ्ट करने की जहमत क्यों नहीं उठाई गई? यदि जानकारी नहीं थी, तो क्षेत्र में सडक़ पर घायल व बेसहारा घूमने वाले मवेशियों की निगरानी और त्वरित रेस्क्यू की शासकीय व्यवस्था आखिर कहां सोई हुई है?
हादसा सिर्फ सडक़ पर नहीं, व्यवस्था की नाकामी भी
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक मवेशी की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की भारी उदासीनता को उजागर करता है। मुख्य मार्गों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगातार भीषण सडक़ दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। इसके बावजूद न तो पशुपालकों पर कोई ठोस नियंत्रण है और न ही हादसों में घायल बेजुबानों की जान बचाने के लिए कोई आपातकालीन हेल्पलाइन या रेस्क्यू तंत्र धरातल पर सक्रिय दिखता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत और पशुपालन विभाग आपसी समन्वय बनाकर सडक़ों पर घूमने वाले मवेशियों के संरक्षण, पशुपालकों की जवाबदेही तय करने तथा आपातकालीन पशु चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें।



