राजनांदगांव (दावा)। राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे) पर बेलगाम दौड़ते भारी वाहनों के कारण मवेशियों की अकाल मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार देर रात शहर के पुलिस लाइन के ठीक सामने नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने सडक़ पर बैठे मवेशियों को बेरहमी से कुचल दिया। हादसे में 7 गायों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रात पौने 12 बजे हुआ हादसा, शव देखकर स्तब्ध रह गए लोग
मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब पौने 12 बजे पुलिस लाइन के सामने नेशनल हाईवे पर मवेशी बैठे हुए थे। इसी दौरान रायपुर की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि 7 मवेशियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। जबकि पास खड़े कुछ अन्य मवेशी बाल-बाल बच गए। दुर्घटना की सूचना पर हाईवे पेट्रोलिंग और स्थानीय कोतवाली पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। सडक़ पर बिखरे पड़े मवेशियों के शवों को देखकर राहगीर और पुलिसकर्मी स्तब्ध रह गए। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और गौ-सेवक मौके पर जमा हो गए। पुलिस ने क्रेन व निगम कर्मियों की मदद से मृत मवेशियों को सडक़ से हटवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
हफ्तेभर पहले पेंड्री में 8 गायों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि ठीक एक सप्ताह पूर्व पेंड्री के समीप नेशनल हाईवे पर एक बेकाबू ट्रक ने सडक़ किनारे बैठी 8 गायों को कुचल दिया था, जबकि एक दर्जन से अधिक मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस हादसे के बाद कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए एनएचएआई प्रबंधन को पत्र लिखकर हाईवे पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही पुलिस प्रशासन को सडक़ों से मवेशियों को हटाने के लिए अभियान चलाने को कहा था। इसके बावजूद हाईवे प्रबंधन और मैदानी अमले की सुस्ती के चलते फिर से यह बड़ा हादसा हो गया।
जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई की मांग
सडक़ों पर मूक पशुओं की लगातार हो रही मौतों को लेकर शहर के गौ-सेवकों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। नागरिकों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी और संबंधित देखरेख एजेंसी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या व लापरवाही का मामला दर्ज करने की मांग की है। प्रशासनिक चेतावनी के बाद भी हाईवे पर प्रकाश व्यवस्था न होना और मवेशियों की धरपकड़ में कोताही बरतना बड़े सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन एनएचएआई के लापरवाह अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर कब तक सख्त दंडात्मक कार्रवाई करता है।



