पात्रता का दायरा बढ़ा, बीते 9 वर्षों से शहरों में निवासरत परिवारों को भी मिलेगा पक्के आशियाने का हक
नगरीय निकायों को 15 दिनों में नए हितग्राहियों को एएचपी आवासों का लाभ दिलाने के कड़े निर्देश
प्रदेश में एएचपी घटक के 79 फीसदी मकान पूरे, 21 हजार से ज्यादा परिवार कर चुके हैं गृह प्रवेश
रायपुर (दावा)। छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों में कच्चे मकानों या किराए पर रहकर जीवनयापन कर रहे गरीब परिवारों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। राज्य शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत हितग्राहियों के निवास की वैधता निर्धारण हेतु कट-ऑफ तिथि को 31 अगस्त 2015 से बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2024 कर दिया है। सरकार के इस कदम से पिछले 9 वर्षों से शहरों में रह रहे हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के मकान का सपना साकार होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मंत्रालय से इस आशय का विधिवत आदेश जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में लिए गए इस निर्णय से आवास से सम्मान, सम्मान से सशक्तीकरण के संकल्प को नई मजबूती मिलेगी।
निकायों को 15 दिन की समय-सीमा, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि बढ़ती आबादी, शहरीकरण और निम्न आय वर्ग की आवासीय जरूरतों को देखते हुए यह संशोधन किया गया है। उन्होंने सभी नगर निगम आयुक्तों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (सीएमओ) को निर्देशित किया है कि संशोधित नियमों के तहत पारदर्शी सर्वेक्षण और सत्यापन कर 15 दिनों के भीतर वंचितों को अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) आवासों का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के सीईओ सुमीत अग्रवाल को इसकी सघन मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। स्लम क्षेत्र के परिवारों के लिए: केंद्र सरकार द्वारा (शेष पृष्ठ ६ पर…)



