बार-बार ट्रिपिंग से कच्चा माल नष्ट, री-स्टार्ट प्रक्रिया में भारी नुकसान
सोमनी, टेड़ेसरा, इंदामरा, सांकरा व डोंगरगांव के कारखानों में संकट, मजदूरों के रोजगार पर मंडराया खतरा
राजनांदगांव (दावा)। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कंपनी की चरमराती व्यवस्था ने उद्योगपतियों की कमर तोड़ दी है। बिना पूर्व सूचना के दिन में कई-कई बार हो रही बिजली कटौती और 5 से 10 घंटे की अघोषित लोड शेडिंग के चलते कारखानों का संचालन करना असंभव हो गया है। लगातार हो रही भारी आर्थिक क्षति के कारण कई उद्योग अब पूरी तरह बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे हजारों मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
कंटिन्यूअस प्रोसेस प्लांट पर सबसे ज्यादा मार
ग्राम सोमनी (खुटेरी) स्थित खाद्य तेल कारखाने (सॉल्वेंट प्लांट एवं रिफाइनरी) का उदाहरण देते हुए संचालकों ने बताया कि उच्च दाब पर आधारित ‘कंटिन्यूअस प्रोसेस’ संयंत्र है। उत्पादन प्रक्रिया के दौरान अचानक बिजली बंद होने से पूरा सिस्टम ठप पड़ जाता है। इस प्रक्रिया में प्रयुक्त अत्यंत ज्वलनशील व उडऩशील पेट्रोलियम पदार्थ हेक्जीन (सॉल्वेंट) सैकड़ों लीटर की मात्रा में उडक़र नष्ट हो जाता है। इसके बाद संयंत्र को पुन: शुरू करने में कम से कम 4 घंटे का समय, अतिरिक्त बिजली और मैनपॉवर लगता है। बार-बार ट्रिपिंग से उत्पादित माल की गुणवत्ता खराब होती है, जिससे उसे बाजार में औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है।
नियमों की अनदेखी, नहीं दी जाती पूर्व सूचना
सीएसपीडीसीएल के नियमानुसार उच्च दाब उपभोक्ताओं को आकस्मिक फॉल्ट को छोडक़र ब्रेकडाउन की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए। लेकिन बीते एक माह से बिना किसी सूचना के दिन में कई बार बिजली गुल हो रही है। बार-बार विद्युत आपूर्ति बाधित होने से पावर फैक्टर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिसका अतिरिक्त आर्थिक दंड भी उद्योग संचालकों को ही भुगतना पड़ रहा है।
जिलेभर के उद्योगों में हाहाकार
यह विकट स्थिति केवल सोमनी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि टेड़ेसरा, सांकरा, इंदामरा, टोलागांव और डोंगरगांव क्षेत्र के पोल्ट्री फार्म, पेपर मिल, राइस मिल, साल्वेंट प्लांट उद्योगों का भी यही हाल है। उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली कंपनी के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण वे हर रोज लाखों रुपये का नुकसान झेलने में असमर्थ हैं। यदि हालात यही रहे तो फैक्ट्रियों में ताला लगाना मजबूरी बन जाएगा। उद्योगपतियों ने मांग की है कि विद्युत वितरण कंपनी औद्योगिक क्षेत्रों की इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करे, ताकि उद्योगों और मजदूरों के भविष्य को बचाया जा सके।


