Home छत्तीसगढ़ नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास…

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास…

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राजनांदगांव (दावा)। नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर भगाने और दुष्कर्म करने के मामले में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) राजनांदगांव ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय के न्यायाधीश अनिल कुमार बारा ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी सोहन यादव उर्फ संत्तू को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए सजा और अर्थदंड से दंडित किया।

शादी का झांसा देकर किया था दुष्कर्म
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) सुश्री प्रिया कांकरिया ने बताया कि अभियुक्त सोहन यादव उर्फ संत्तू (उम्र 30 वर्ष), निवासी ग्राम जंगलेसर (पुलिस चौकी सुरगी, हाल मुकाम ग्राम बोईरडीह, पुलिस चौकी चिखली, थाना कोतवाली) ने नाबालिग बालिका को शादी का प्रलोभन देकर बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया था। आरोपी ने उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया। जिससे पीडि़ता गर्भवती हो गई। पीडि़ता के पिता की शिकायत पर चिखली चौकी (कोतवाली थाना) में मामला दर्ज कर विवेचना के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया था।

अदालत द्वारा सुनाई गई सजा
विशेष न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। आईपीसी की धारा 376(3) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)। पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास)। आईपीसी की धारा 366 के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास) है।

फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि जब किसी स्त्री के साथ दुष्कर्म जैसा अपराध होता है, तो वह केवल शारीरिक हिंसा नहीं होती, बल्कि ऐसा मानसिक आघात होता है जो जीवनपर्यंत बना रहता है।
शारीरिक चोटें समय के साथ भर सकती हैं, लेकिन मानसिक पीड़ा का घाव कभी नहीं भरता। इसलिए ऐसे जघन्य अपराधों में अभियुक्त के प्रति किसी भी प्रकार की अनावश्यक सहानुभूति या उदारता बरता जाना कतई उचित नहीं है।

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