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मृत बड़े भाई के खाते से चेक में फर्जी हस्ताक्षर कर 2 लाख निकालने का प्रयास आरोपी छोटे भाई को 5 वर्ष का सश्रम कारावास…

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अपर सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का दोषमुक्ति आदेश किया निरस्त, धारा 420, 467 और 471 के तहत सुनाई सजा, अर्थदंड भी लगाया

राजनांदगांव (दावा)। दिवंगत बड़े भाई के बैंक खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर 2 लाख रुपये निकालने का प्रयास करने वाले छोटे भाई को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल के न्यायालय ने मामले में शासन की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए दोषमुक्ति के फैसले को पलट दिया है।

खुद को बड़ा भाई बताकर जारी कराई थी चेकबुक
मामले में राज्य शासन की ओर से पैरवी करने वाले जिला लोक अभियोजक राजेश खांडेकर ने बताया कि कंचन बाग राजनांदगांव निवासी मोहम्मद इकबाल की मृत्यु 2 अक्टूबर 2011 को हो चुकी थी। उनका बैंक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा राजनांदगांव में संचालित था। बड़े भाई की मृत्यु के बाद 9 जनवरी 2012 को छोटे भाई मोहम्मद अली ने बैंक में खुद को मोहम्मद इकबाल बताकर धोखे से चेकबुक जारी करवा ली। इसके बाद उसने चेक में 2 लाख रुपये की राशि भरकर भाई के फर्जी हस्ताक्षर किए और भुगतान के लिए बैंक में पेश कर टोकन ले लिया। हस्ताक्षर मिलान के दौरान बैंक प्रबंधक को हस्ताक्षर फर्जी होने का संदेह हुआ। जिससे धोखाधड़ी उजागर हो गई। मामले की सूचना पर थाना सिटी कोतवाली द्वारा आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 एवं 471 के तहत अपराध दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया गया था।

अपीलीय अदालत ने पलटा निचली अदालत का फैसला
विचारण न्यायालय ने 23 नवंबर 2023 को दिए अपने फैसले में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। निचली अदालत के इस निर्णय के खिलाफ शासन की ओर से सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। अपीलीय न्यायालय की न्यायाधीश श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने प्रकरण के सूक्ष्म परीक्षण और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद 6 अक्टूबर 2026 को निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने आरोपी मोहम्मद अली (35 वर्ष), निवासी कंचन बाग, वार्ड 27, शिव मंदिर के पास को दोषी पाते हुए दंडादेश पारित किया- धारा 420 भादवि: 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपए अर्थदंड। धारा 467 भादवि: 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपए अर्थदंड। धारा 471 भादवि: 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000 रूपए अर्थदंड। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर अभियुक्त को प्रत्येक धारा के तहत तीन-तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

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