दो साल में करोड़ों की लागत से बनीं सड़कें उखड़ीं, ▶️केंद्र और राज्य सरकार के आदेश पर गुणवत्ता और जवाबदेही तय हो
राजनांदगांव। जिले और शहर में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन कई सड़कों की स्थिति निर्माण के कुछ ही महीनों बाद खराब हो जाने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक फड़नवीस ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि शहर में होने वाले सभी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क, नाली और भवन निर्माण में खर्च होने वाली राशि, निर्माण की निर्धारित गुणवत्ता तथा संबंधित अधिकारियों की जानकारी आम जनता को मिलनी चाहिए, ताकि विकास कार्यों की निगरानी नागरिक भी कर सकें।
श्री फड़नवीस ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2012 और 2016 में निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य शुरू होने से पहले संबंधित स्थल पर सूचना बोर्ड लगाकर कार्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की जानी चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर आम नागरिकों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि किसी निर्माण कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है काम कब शुरू हुआ है और उसे पूरा करने की समय-सीमा क्या है। उन्होंने कहा कि निर्माण स्थल पर लगाए जाने वाले बोर्ड में कार्य प्रारंभ होने की तारीख, स्वीकृत राशि, सड़क एवं नाली की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई सहित निर्माण से संबंधित तकनीकी विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। भवन निर्माण के मामले में भी कार्य की स्वीकृत राशि, निर्माण का विवरण तथा संबंधित इंजीनियर का नाम और मोबाइल नंबर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इससे नागरिकों को अपने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की वास्तविक जानकारी मिल सकेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकेगा। श्री फड़नवीस ने आरोप लगाया कि राजनांदगांव नगर निगम क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान सड़कों के डामरीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन कई सड़कों की हालत कुछ ही महीनों में खराब हो गई। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ने लगी है, तो कहीं गड्ढे बनने और धूल उड़ने की समस्या सामने आ रही है। ऐसी स्थिति में दोबारा डामरीकरण पर राशि खर्च करनी पड़ती है जिससे आम जनता के टैक्स से प्राप्त धन के सदुपयोग पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सड़क का निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुरूप किया गया है तो वह इतनी जल्दी खराब क्यों हो रही है इसकी जांच होनी चाहिए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए और जहां लापरवाही या तकनीकी खामी सामने आए, वहां संबंधित एजेंसी तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। श्री फड़नवीस ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान संबंधित इंजीनियरों की उपस्थिति और निगरानी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, कई बार निर्माण कार्य के दौरान क्षेत्र के जिम्मेदार इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहते। ऐसे में निर्माण सामग्री, निर्धारित मोटाई और तकनीकी मानकों का सही ढंग से पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि नगर निगम और संबंधित विभाग निर्माण कार्यों की नियमित जांच करें। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, डामर की निर्धारित मोटाई और कार्य की तकनीकी स्वीकृति के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित किया जाए। यदि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही निर्माण पूरा होने के बाद भी सड़क की स्थिति पर नजर रखी जाए, ताकि कम समय में सड़क खराब होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके। श्री फड़नवीस ने कहा कि बार-बार पुरानी सड़कों के ऊपर डामरीकरण करने से सड़क का स्तर लगातार ऊंचा होता जाता है। इससे आसपास के मकानों के प्रवेश द्वार और सड़क के बीच ऊंचाई का अंतर कम होने के बजाय कई जगह सड़क का स्तर मकानों से ऊपर पहुंचने की समस्या पैदा हो सकती है। इसका असर स्थानीय नागरिकों की आवाजाही और जल निकासी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि डामरीकरण के दौरान संबंधित सड़क की वास्तविक स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाना चाहिए। जहां आवश्यक हो, वहां पुरानी या क्षतिग्रस्त परत को हटाकर निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार ही नई परत बिछाई जाए। केवल ऊपर से नई परत चढ़ाकर कार्य पूरा कर देना स्थायी समाधान नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। श्री फड़नवीस ने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि शासन द्वारा जारी पारदर्शिता संबंधी निर्देशों का प्रभावी पालन कराया जाए। प्रत्येक निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाया जाए, स्वीकृत राशि और तकनीकी विवरण सार्वजनिक किए जाएं तथा कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता रहने से नागरिकों को पता चलेगा कि उनके क्षेत्र में किस काम के लिए कितनी राशि खर्च की जा रही है और निर्माण किस गुणवत्ता मानक के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में जनता के पैसे का सदुपयोग होना चाहिए। सड़कों का निर्माण इस तरह किया जाए कि वे लंबे समय तक टिकाऊ रहें और नागरिकों को बार-बार गड्ढों, धूल तथा खराब सड़क की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने जोर दिया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना नगर निगम प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि शहर के विकास पर खर्च होने वाली राशि का लाभ वास्तव में आम जनता तक पहुंच सके।




