बोरतलाव हादसे पर सभापति प्रशांत का बड़ा हमला : अवैध डबरी कांग्रेस की देन, विधायक की चुप्पी चिंताजनक
राजनांदगांव (दावा)। 7 गरीब आदिवासी परिवार के साथ घटित दुखद घटना के दौरान क्षेत्रीय विधायक दलेश्वर साहू द्वारा पीडि़त परिवार को किसी भी प्रकार की मदद नहीं करना, यहां तक की संवेदना व्यक्त करने में भी कोताही बरतने पर भडक़े जिला पंचायत सभापति प्रशांत कोड़ापे द्वारा विधायक के इस कृत्य की कड़ी आलोचना की गई।
मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने मृतक मासूम बच्चों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया एवं परिजनों को सांत्वना दिया। प्रशांत कोड़ापे ने घटना कि जानकारी देते हुए कहा कि यह अवैध डबरी के खनन का मामला है। जिसे रेल्वे ठेकेदार ने ग्रामीणों के मना करने के बाद भी खोदा गया और ग्रामीणों की जान को जोखिम में डाला गया। जिसका खामियाजा आज तीन जानों को गवां कर देना पड़ा।
सभापति श्री कोड़ापे ने 25 अप्रैल 2020 के उस प्राथमिकी का भी जिक्र किया। जिसमें ग्रामीणों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 294, 506, और 34 के तहत गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार के संरक्षण में ठेकेदार ने ग्रामीणों को डराया और धमकाया। श्री कोड़ापे ने इस मामले में डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू की भूमिका को भी संदिग्ध बताते हुए कहा कि मृत्यु के तीन दिन बाद भी विधायक व उसके किसी प्रतिनिधि ने न तो मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और न मृतकों के परिवारजनों से संपर्क किया न ही कोई सांत्वना, मुआवजा या क्षतिपूर्ति की घोषणा की। कोड़ापे ने इसे घोर संवेदनहीनता एवं निष्ठुरता भरा रवैया बताया। मालूम होवे कि गत दिनों डोंगरगढ़ ब्लॉक के बोर तलाव में उत्खनित अवैध डबरी में डूबने से तीन बच्चों का निधन हुआ था। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
बरसते पानी में खुले आसमान के नीचे बच्चों का दाह संस्कार, मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे है क्षेत्रवासी
सभापति प्रशांत कोड़ापे ने एक और गंभीर पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षेत्र के सबसे बड़े ग्राम पंचायत में आज अंत्येष्टि कार्यक्रम भारी बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे किया गया। यहां न तो कोई मुक्तिधाम का निर्माण किया गया है न ही कोई शेड है। जिससे चिता की अग्नि को जलने में भी कठिनाई होती है। कोड़ापे ने विधायक दलेश्वर साहू को अवसरवादी नेता बताते हुए कहा कि जहां उन्हें फायदा दिखता है। वे केवल वहीं पहुंचते है। 12 साल बाद भी इस गांव में शेड जैसी मूलभूत सुविधा न होना उनकी निष्क्रियता एवं आदिवासी क्षेत्रों के प्रति सौतेला व्यवहार का प्रमाण है।
कांग्रेसियों ने ज्ञापन देकर औपचारिकता निभाया गया
सभापति श्री कोड़ापे ने बोरतलाव में घटित अप्रिय घटना जिसमें तीन मासूम बच्चों की मृत्यु पर राजनीति करने गए डोंगरगढ़ के कुछ कांग्रेसी नेताओं को भी आड़े हाथों लिया। श्री कोड़ापे ने कहा पुलिस ने तत्परता से घटना पर एक्शन लेते हुए दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। जबकि डोंगरगढ़ से राजनीतिक पर्यटन करने आए कुछ कांग्रेसी नेताओं ने दोपहर 3 बजे के बाद थाने पहुंच ज्ञापन दिया। प्रशांत कोड़ापे ने उन्हें राजनीति नहीं संवेदनशीलता दिखाने की नसीहत दी। उन्होंने विधायक दलेश्वर साहू से अनुरोध करते हुए कहा कि अभी भी देर नहीं हुई। मृतकों के परिजनों से मिले एवं मुआवजा की घोषणा करें। आपके 12 साल की विधायकी में भले ही यह छोटी घटना होगी, लेकिन जिन परिवारों ने अपना बेटा खोया है। उनके लिए यह पहाड़ से बड़ा दुख है। इसके पूर्व भी विधानसभा क्षेत्र में कई दुखद घटनाक्रम ऐसे हुए जहां क्षेत्रीय विधायक की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। जिसमे प्रमुख रूप से खातुटोला बैराज में घटित घटना है। जिसमे गरीब परिवार ने अपना जवान पुत्र खोया था। मृतक की बॉडी की खोज बिन में दुर्ग से पहुंचे विशेषज्ञ दल को तीन दिनों तक मशक्कत करना पड़ा था। इस दौरान असंवेदनशील विधायक द्वारा मृतक के परिजनों को सांत्वना भी देना जरूरी नहीं समझा गया।
जिला प्रशासन द्वारा मृतक परिवार के सदस्यों के खातों में चार-चार लाख रूपए की मुआवजा राशि हस्तांतरित की गई – प्रशांत कोड़ापे
जिला पंचायत सभापति प्रशांत कोड़ापे से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन की ओर से आज पीडि़त परिवार के सदस्यों के खातों में मुआवजा राशि के रूप में चार-चार लाख रुपए हस्तांतरित किए गए। श्री कोड़ापे ने बताया कि इसके अलावा शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक पीडि़त परिवार को एक -एक लाख रुपए की राशि हस्तांतरित होने की प्रक्रियाधीन है।



