जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग राजनांदगांव का फैसला
इंडियन ओवरसीज बैंक को 45 दिनों के भीतर मानसिक, आर्थिक क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय भुगतान करने का आदेश
राजनांदगांव (दावा)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग राजनांदगांव ने बैंक द्वारा बिना किसी ठोस कारण के ग्राहक का बचत खाता फ्रिज करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने अनावेदक इंडियन ओवरसीज बैंक राजनांदगांव को परिवादी को क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के रूप में कुल 15,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। परिवादी दुष्यंत वर्मा का बचत खाता इंडियन ओवरसीज बैंक, राजनांदगांव में संचालित है। उनके खाते में ढ्ढरूक्कस् (तत्काल भुगतान सेवा) के माध्यम से 1,000 रुपये की राशि आई थी, जिसके बाद बैंक ने बिना किसी वैध अथवा ठोस कारण के उनका पूरा खाता ही फ्रिज कर दिया।
परिवादी द्वारा खाता अनफ्रीज करने के लिए बैंक प्रबंधन से बार-बार निवेदन किया गया, लेकिन बैंक ने कोई कार्रवाई नहीं की। बैंक के इस रवैये से परेशान होकर परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया था।
मामले की सुनवाई के उपरांत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू एवं सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने बैंक की सेवा में कमी पाते हुए अपना फैसला सुनाया। आयोग ने अनावेदक इंडियन ओवरसीज बैंक राजनांदगांव को मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये (कुल 15,000 रुपये) परिवादी को देने का आदेश दिया। यह राशि 20 जुलाई 2026 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ 45 दिवस के भीतर भुगतान करनी होगी। तय 45 दिनों की अवधि में राशि का भुगतान न करने पर बैंक को 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करना पड़ेगा।
प्रकरण में परिवादी दुष्यंत वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र बख्शी व अधिवक्ता रवि पित्रोडा ने प्रभावी पैरवी की।
