Home छत्तीसगढ़ खुज्जी क्षेत्र में ईंट माफियाओं का राज…

खुज्जी क्षेत्र में ईंट माफियाओं का राज…

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० ट्रस्ट की जमीन पर कब्जा कर बना और बेच रहे थे ईंट
० 3 लाख 20 हजार ईंट हुआ जब्त-किया सरपंच के सुपुर्द

डोंगरगांव (दावा)। डोंगरगांव अनुभाग के अंतर्गत अवैध ईंट्टों की भरमार है और लगातार शिकायत और खबरों के प्रकाशन के बाद भी न तो स्थानीय प्रशासन ने ध्यान दिया और न ही जिला प्रशासन ने कोई दिलचस्पी दिखाई. हाल ही में बडगांव चारभांठा के ग्रामीणों के भारी आक्रोश के बाद जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्यवाही कर लाखों ईंटों का जब्ती बनाया है. मिली जानकारी के अनुसार बडगांव चारभांठा स्थित एक ट्रस्ट की जमीन पर प्रभुलाल पाड़े के द्वारा विगत कई वर्षों से अवैध कब्जा कर मनमाने ढंग से कोयला, लकड़ी, मुर्गी खाद स्टॉक कर बड़ी मात्रा में ईंटों का निर्माण किया जा रहा है और पके हुए ईंटों को बेचा जा रहा था. इस मामले में ग्राम बडगांव चारभांठा के ग्रामीणों ने लगातार शिकायत की और मंगलवार 22 सितंबर को पूरा गांव अवैध ईंट भ_े में इक_ा होकर कार्यवाही की मांग की जिसपर डोंगरगांव तहसील कार्यालय से नायब तहसीलदार जेपी खूंटे, राजस्व निरीक्षक फारूख खान, पटवारी सुमन चंद्रवंशी पहुंचे थे. इस दौरान ग्रामीणों के साथ उपस्थित ग्राम सरपंच ज्योति साहू सहित ग्राम पटेल, कोटवार की मौजूदगी में इस बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया गया. ग्रामीणों ने पहुंचे अधिकारी व कर्मचारियों को बताया कि उक्त व्यक्ति विगत कई वर्षों से ईंट का अवैध निर्माण यहाँ पर किया जा रहा है और निर्माण के दौरान मुर्गी खाद से गांव के आसपास का पूरा माहौल खराब और बदबूदार हो गया है. इसके चलते पूरे क्षेत्र के खेतों में कीटों का प्रकोप बढ़ गया है और फसलें खराब हो रही हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान होगा. इस मामले में
नायब तहसीलदार श्री खूंटे ने बताया कि ग्राम बडगांव चारभांठा में प्रभूलाल पांड़े के द्वारा अवैध ईंट रखा गया था और मौके से तीन लाख बीस हजार ईंटों को जब्त कर ग्राम सरपंच के सुपुर्द करते हुए छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 247-7 के तहत कार्यवाही की बात कही है.

बता दें कि खुज्जी, करमरी, कुमर्दा, डोंगरगांव क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अवैध ईंट भ_ों का संचालन किया जा रहा है जहाँ बाहरी लोगों द्वारा पाड़े के नाम पर किसानों की जमीनों को किराये पर लेकर लाल ईंट का अवैध कारोबार कर रहे हैं इतना ही नहीं उनके द्वारा आसपास के जंगलों को भी नष्ट किया जा रहा है और कीमती व ईमारती लकडियों को आग के हवाले कर दिया जाता है. इसके साथ ही किसानों को शासकीय अनुदान से सिंचाई के लिए मिलने वाले मोटर पंप व बिजली को भी उपयोग अवैध तरीके से किया जा रहा है. इस गंभीर मामले में आज तक शासन प्रशासन के द्वारा कोई बड़ी या कड़ी कार्यवाही नहीं की गई है जिससे इन अवैध कारोबार को अंजाम देने वाले ईंट माफियाओं को सबक मिल सके. कुछ दिनों पूर्व क्षेत्र के ग्राम माहुलझोपड़ी में कार्यवाही के नाम पर इसी तरह ईंट जप्ती की कार्यवाही की गई थी किन्तु कुछ दिनों पश्चात इन ईंटों का क्या हुआ किसी को पता नहीं?

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