0 जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
0 घटिया निर्माण से पहली बारिश में उखड़ा डामर, जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढे
राजनांदगांव। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत राजनांदगांव-खैरागढ़ मुख्य मार्ग के नवीनीकरण एवं राजनांदगांव-मोहला, मानपुर सडक़ निर्माण परियोजनाओं में गंभीर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने जनहित के मुद्दों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल
कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया गया कि राजनांदगांव से खैरागढ़ मुख्य मार्ग के उन्नयन व नवीनीकरण में तकनीकी मानकों की जमकर अनदेखी की गई। बारिश शुरू होने से ठीक पहले किए गए डामरीकरण की परत अभी से कई जगहों से उखड़ चुकी है और सडक़ पर जानलेवा गड्ढे उभर आए हैं। सडक़ की सतह पर भारी अंडुलेशन (असमतल सतह) स्पष्ट दिखाई दे रही है, जिससे साबित होता है कि लेवलिंग और प्रोफाइलिंग का काम तय मानकों पर नहीं हुआ। इसके अलावा सडक़ की आधार परतों में गुणवत्ताहीन व मिट्टी युक्त सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग किया गया है।
डोंगरगांव में 4 साल से अधूरी सडक़, हादसे बढ़े
श्री वर्मा ने रेखांकित किया कि राजनांदगांव-मोहला-मानपुर पैकेज और डोंगरगांव नगर की फोरलेन सडक़ परियोजना पिछले चार वर्षों से अधूरी लटकी हुई है। डोंगरगांव से कमरदा और आसपास के हिस्सों में बारिश से ठीक पहले बिना किसी वैकल्पिक यातायात योजना के सडक़ को मिलिंग मशीन से उधेड़ कर छोड़ दिया गया। इसके चलते पूरा मार्ग कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो चुका है, जिससे आए दिन सडक़ हादसे हो रहे हैं। स्थानीय व्यापारी, छात्र और राहगीर धूल, जाम और जलभराव से बेहद त्रस्त हैं।
दोषियों पर एफआईआर व ब्लैकलिस्टिंग की मांग
ज्ञापन में विभागीय मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा गया कि संबंधित ठेकेदार के पुत्र द्वारा विभागीय कर्मियों के साथ मारपीट और जानलेवा हमले की पूर्व में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अफसरों से सांठगांठ के चलते सख्त कदम नहीं उठाए गए। श्री वर्मा ने कलेक्टर से प्रमुख मांगें रखीं। जिसमें सडक़ निर्माण में प्रयुक्त जीएसबी, डब्ल्यूएमएम, सब-ग्रेड, बिटुमेन की मात्रा, मोटाई और घनत्व की जांच एनएबीएल मान्यता प्राप्त स्वतंत्र लैब से कराई जाए। निर्माण में 4 साल की अत्यधिक देरी और बार-बार दी गई समयवृद्धि में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाए। जांच में तकनीकी खामियां व वित्तीय अनियमितता साबित होने पर ठेकेदार और दोषी अफसरों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। दोषपूर्ण ड्रेनेज व्यवस्था को तत्काल सुधारा जाए और संपूर्ण गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही सडक़ को विभाग द्वारा हैंडओवर लिया जाए।



