Home सम्पादकीय / विचार संसद के सत्रों में काम नहीं होने से 10 सालों में जनता...

संसद के सत्रों में काम नहीं होने से 10 सालों में जनता के 3300 करोड़ बर्बाद…

23
0

दीपक भाई बुद्धदेव

संसद का मानसून सत्र शुरू हुवे ६ दिन हो गए। इसके बावजुद, अभी तक संसद में काम शुरू नहीं हुआ है। केन्द्र सरकार का सतत् विरोध, विपक्षी दलों का हंगामा और नारेबाजी के कारण मानसून सत्र चल ही नहीं पाया। गत शुक्रवार को भी काम शुरू करने के प्रयास हुवे थे, किन्तु सफलता नहीं मिली। सोमवार तक संसद को स्थगित करना पड़ा था। गत सोमवार को भी धांधल-धमाल के चलते सत्ता पक्ष ने लोक परीक्षा संशोधन बिल पेश किया और उसके बाद फिर संसद स्थगित हो गई थी।भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए इसे शर्मनाक ही कहना चाहिए कि, सांसदों के द्वारा संसद के कार्यों को चलने नहीं दिया जाता। लगभग १.५० अरब की जनसंख्या वाले देश में जिस विश्वास व आस्था के साथ जनता अपना जनप्रतिनिधि चयन कर, सांसद चुनकर दिल्ली में भेजते हैं किन्तु, वहीं सांसदों की सांठगांठ, खरीद फरौख्त और राजनैतिक ड्रामाबाजी में रचे-पचे रहते हैं। जनता का पैसा फिजूल बर्बाद हो रहा है। इससे जनता की उम्मीदों पर पानी फिर जाता है।
देश की सबसे बड़ी पंचायत व सबसे पवित्र स्तंभ याने देश की संसद है। संसद ऐसा सर्वोच्च स्थान है, जहां १५० करोड़ नागरिकों का भविष्य, उनके अधिकार, टैक्स का सदुपयोग और देश के लिए नए कानून बनाने के विषयों पर चर्चाएं होती हैं और उसके बाद निर्णय लिए जाते हैं। परन्तु, पिछले 10 सालों से देश के संसद नीतियों, कानून व न्याय के विषयों पर विरोध, शोर शराबा, नारेबाजी, बैनर दर्शाते और फिर संसद के दोनों गृहों को स्थगित करने की राजनीति का मैदान बन गया है।
जनता अपने खून-पसीने की कमाई में से टैक्स भरती है, जिससे देश सुचारू रूप से चल सके। परन्तु, जब लोकसभा और राज्यसभा में एक घण्टे भी काम न हो, तब इसे जनता का दुर्भाग्य कहना चाहिए। प्रत्येक एक मिनट में जनता के लाखों रूपए बर्बाद हो जाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों का विरोध, हंगामा और ड्रामाबाजी के कारण पिछले 10 सालों में जनता के 3300 करोड़ रूपयों का नाश हो गया है।
चिंताजनक यह कि, हमारे सांसदगण नैतिकता भूल गए हैं। सत्ता में रहने, सत्ता में आने के बाद अनेक सांसद अपनी कीमत आंकने लग जाते हैं। कभी भी चाहे जब जिस प्रकार सांसदों को खरीदा जा सकता है। अपनी पार्टी में लाया जा सकता है। सत्ता हासिल करने सब कुछ चलता है। यहां जन कल्याण को दरकिनार कर दिया जाता है। उसमें भी संसद की कार्यप्रणाली के दौरान विरोध करना और जनता की समस्याओं की अवहेलना करना तो सामान्य बात हो गई है। हर साल, सांसदों के पीछे करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं। इसके बावजुद, कोई फलदायी परिणाम नहीं मिलते।
उल्लेखनीय कि, संसद भवन का संचालन यह केवल सांसदों के वेतन तक सीमित नहीं है। इस संकुल को चलाने के लिए विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाईटेक टेक्नालाजी, सुरक्षा व्यवस्था, सांसदों के भत्ते, कर्मचारियों का वेतन, मुद्रण, बिजली खर्च और लाजिस्टिक के पीछे बड़ा खर्च किया जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, संसद के दोनों गृहों लोकसभा और राज्यसभा चलाने के लिए प्रति मिनट का अनुमानित खर्च २.५० लाख रूपए है। प्रति घण्टे संसद चलाने का खर्च लगभग १.५० करोड़ तक पहुंचता है। इसी प्रकार, संसद का सामान्यत: प्रतिदिन का समय ६ घण्टे का होता है। प्रतिदिन के कार्य के पीछे लगभग 8 से 9 करोड़ रूपए खर्च होते हैं।
प्रत्येक सांसद के पीछे वर्ष में 35 लाख रूपए केवल वेतन में खर्च होते हैं। संसद चले या न चले, किन्तु सांसदों की जेबें भरी रहती हैं। उनके भत्ते, उनकी सुविधाएं या फण्ड में से कुछ भी घटता नहीं है। सांसदों को हर माह २.८६ लाख का वेतन भुगतान होता है। इसके अलावा, उन्हें ३४ जितने डोमेस्टिक फ्लाईट की ट्रेवलिंग नि:शुल्क मिलती है। ट्रेनों में जाने के लिए ए.सी. की टिकट नि:शुल्क और यह सुविधा उनके परिवारों को भी मिलती है। इसके सिवाय हर साल ५०,००० नि:शुल्क बिजली और ४००० किलोलीटर पानी भी नि:शुल्क मिलता है। सांसदों और उनके परिवारों का श्रेष्ठतम इलाज भी नि:शुल्क होता है। संसद का कार्यकाल चालू हो, तब रेन्ट फ्री मकान मिलते हैं। इसके अलावा, सत्र चालू हो तब प्रतिदिन २५०० रूपए घर से सरकारी कार में संसद जाने के लिए, भत्ते का भी भुगतान होता है। इसके अलावा, अपने संसदीय गृह क्षेत्र के विकास के लिए ५ करोड़ रूपए हर साल मिलते हैं।
इसे जनता का दुर्भाग्य ही कहें कि कई सांसद सदन में मौन रहते हैं। वे अपने क्षेत्र की समस्याओं बाबत कुछ नहीं बोलते। कई तो संसद में भी अनुपस्थित रहते हैं। लोग मानते है कि संसद यह जनता की आवाज है। उनके टैक्स के पैसों से संसद में काम होता है। किन्तु, इसका उचित प्रतिसाद जनता को नहीं मिल रहा है। ऐसा ही चलता रहा तो आम जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से विश्वास ही उठ जाएगा।

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here